पंचांग
अमरावती पंचांग, शनिवार १२ डिसेंबर 2026
तुम्ही अमरावती निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी महाराष्ट्र प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना मुंबई शहरासाठी केली आहे. अमरावती येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- तृतीया (11:23:18 – 14:06:38)
- नक्षत्र
- उत्तराषाढा (03:04:07 – 06:12:00)
- योग
- वृद्धी (10:17:42 – 11:16:17)
- करण
- गर (00:44:38 – 14:06:38)
- वार
- शनिवार (07:01:58 – 07:02:33)
- महिना (अमांत)
- मार्गशीर्ष
- महिना (पौर्णिमांत)
- मार्गशीर्ष
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- हेमंत
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढती चंद्रकोर
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ८%
- चंद्र राशी
- धनू, पर्यंत
- सूर्य रास
- वृश्चिक
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- रवि योग
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक |
सण आणि व्रते
मार्तंड भैरव षड्रात्रोत्सवमुहूर्त: – जेजुरी येथील खंडोबाच्या मार्तंड भैरव रूपाचा मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदेपासून सहा तिथींचा उत्सव.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- विष्टी करण
- वार-नक्षत्र योग