पंचांग
आंध्र / तेलंगण पंचांग, मंगळवार १० नोव्हेंबर 2026
या पानावरील वेळा आणि तिथी आंध्र / तेलंगण प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना हैदराबाद शहरासाठी केली आहे.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- प्रतिपदा (12:31:57 – 14:00:27)
- नक्षत्र
- विशाखा (07:23:52 – 09:19:03)
- योग
- शोभन (02:56:31 – 03:09:12)
- करण
- बव (01:13:04 – 14:00:27)
- वार
- मंगळवार (06:18:20 – 06:18:49)
- महिना (अमांत)
- कार्तिक
- महिना (पौर्णिमांत)
- कार्तिक
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- शरद
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- अमावस्या
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- १%
- चंद्र राशी
- वृश्चिक
- सूर्य रास
- तूळ
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ |
सण आणि व्रते
बलिप्रतिपदामुहूर्त: – कार्तिक शुक्ल प्रतिपदेला साजरा होणारा दिवस. या दिवशी राजा बळीचे स्मरण केले जाते आणि महाराष्ट्रात पत्नी पतीचे औक्षण करते.
गोवर्धन पूजामुहूर्त: – कार्तिक शुक्ल प्रतिपदेला उत्तर भारत, गुजरात व वैष्णव परंपरेत गोवर्धन पर्वताची पूजा करून अन्नकूट अर्पण केला जातो.
महावीर जैन संवत २५५३मुहूर्त: – जैन परंपरेतील महावीर संवताच्या नवीन वर्षाची सुरुवात कार्तिक शुक्ल प्रतिपदेला होते.
कार्तिक महिना सुरूअमान्त पद्धतीनुसार नवीन चांद्र महिन्याची सुरुवात.
विक्रम संवत २०८३ सुरूकार्तिक शुद्ध प्रतिपदेला विक्रम संवताचे नवीन वर्ष सुरू होते.