पंचांग
बेंगळुरू पंचांग, गुरुवार ५ नोव्हेंबर 2026
तुम्ही बेंगळुरू निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी कर्नाटक प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना बेंगळुरू शहरासाठी केली आहे. बेंगळुरू येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- एकादशी (11:03:37 – 10:35:59)
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी (03:29:57 – 03:55:46)
- योग
- इंद्र (08:00:27 – 06:25:58)
- करण
- बालव (22:46:55 – 10:35:59)
- वार
- गुरुवार (06:14:24 – 06:14:44)
- महिना (अमांत)
- आश्विन
- महिना (पौर्णिमांत)
- कार्तिक
- पक्ष
- कृष्ण
- ऋतू
- शरद
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- घटती चंद्रकोर
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- १८%
- चंद्र राशी
- सिंह, पर्यंत
- सूर्य रास
- तूळ
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ |
सण आणि व्रते
वसुबारसमुहूर्त: – गायी व वासरांच्या पूजनाचा आणि त्यांच्याप्रती कृतज्ञता व्यक्त करण्याचा दिवस.
रमा एकादशीमुहूर्त: – आश्विन कृष्ण एकादशीला रमा एकादशी म्हणतात. हे व्रत भगवान विष्णूंच्या पूजेसाठी केले जाते.