पंचांग
चेन्नई पंचांग, शनिवार २१ नोव्हेंबर 2026
तुम्ही चेन्नई निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी तमिळनाडू प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना चेन्नई शहरासाठी केली आहे. चेन्नई येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- एकादशी (07:16:01 – 06:31:52)
- नक्षत्र
- उत्तरा भाद्रपदा (06:56:25 – 06:50:29)
- योग
- सिद्धी (04:55:14 – 02:30:20)
- करण
- विष्टी (19:00:35 – 06:31:52)
- वार
- शनिवार (06:10:17 – 06:10:45)
- महिना (अमांत)
- कार्तिक
- महिना (पौर्णिमांत)
- कार्तिक
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- शरद
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढता चंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ८३%
- चंद्र राशी
- मीन, पर्यंत
- सूर्य रास
- वृश्चिक
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- पंचक
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- रवि योग
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक |
सण आणि व्रते
चातुर्मास समाप्तीमुहूर्त: – चार महिन्यांचा चातुर्मास कार्तिक शुक्ल एकादशीला संपतो; परंपरेनुसार पालनात फरक असतो.
तुळशी विवाह आरंभमुहूर्त: – कार्तिक शुद्ध द्वादशीला तुळशी वृक्षाचा विवाह साजरा केला जातो.
तुळशी विवाहमुहूर्त: – कार्तिक शुक्ल द्वादशीला तुळशी (वृंदा) व शालिग्राम (विष्णू) यांच्या विवाह सोहळ्याचे आचरण; पौर्णिमेपर्यंत सुरू राहणाऱ्या या उत्सवाची सुरुवात.
विष्णु-प्रबोधोत्सवमुहूर्त: – चातुर्मास संपून भगवान विष्णु जागृत होतात, अशी मान्यता असलेला हा उत्सव कार्तिक शुक्ल एकादशीला साजरा केला जातो.
प्रबोधिनी एकादशीमुहूर्त: – कार्तिक शुक्ल एकादशीला प्रबोधिनी एकादशी म्हणतात. या दिवशी चातुर्मास संपतो आणि भगवान विष्णू शयनातून जागे होतात अशी श्रद्धा आहे.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- विष्टी करण
- पंचक
- वार-नक्षत्र योग