पंचांग
चेन्नई पंचांग, रविवार १६ मे 2027
तुम्ही चेन्नई निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी तमिळनाडू प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना चेन्नई शहरासाठी केली आहे. चेन्नई येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- एकादशी (18:17:51 – 17:13:47)
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी (11:59:54 – 11:35:13)
- योग
- वज्र (04:30:10 – 02:42:05)
- करण
- वणिज (18:17:51 – 05:43:33)
- वार
- रविवार (05:43:18 – 05:43:04)
- महिना (अमांत)
- वैशाख
- महिना (पौर्णिमांत)
- वैशाख
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- वसंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- प्लवंग
- संवत
- शक संवत 1949, विक्रम संवत 2084
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढता चंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ७९%
- चंद्र राशी
- कन्या
- सूर्य रास
- वृषभ
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- रवि योग
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष |
सण आणि व्रते
मोहिनी एकादशीमुहूर्त: – वैशाख शुक्ल एकादशीला भगवान विष्णूंच्या मोहिनी अवताराचे स्मरण केले जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- वज्र योग
- विष्टी करण
- वार-नक्षत्र योग