पंचांग
दिल्ली पंचांग, शुक्रवार ६ नोव्हेंबर 2026
तुम्ही दिल्ली निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी उत्तर भारत प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना दिल्ली शहरासाठी केली आहे. दिल्ली येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- द्वादशी (10:35:59 – 10:30:59)
- नक्षत्र
- हस्त (03:55:46 – 04:43:08)
- योग
- विष्कंभ (05:09:09 – 04:09:31)
- करण
- तैतिल (22:30:41 – 10:30:59)
- वार
- शुक्रवार (06:37:09 – 06:37:55)
- महिना (अमांत)
- आश्विन
- महिना (पौर्णिमांत)
- कार्तिक
- पक्ष
- कृष्ण
- ऋतू
- शरद
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- घटती चंद्रकोर
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ११%
- चंद्र राशी
- कन्या
- सूर्य रास
- तूळ
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ |
सण आणि व्रते
प्रदोषमुहूर्त: – प्रत्येक पक्षाच्या त्रयोदशीला संध्याकाळी शिवाची उपासना.
गुरु द्वादशीमुहूर्त: – अमान्त आश्विन कृष्ण द्वादशीला गुरूंच्या पूजनाचे हे व्रत स्मार्त परंपरेत केले जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- विष्कंभ योग