पंचांग
दिल्ली पंचांग, सोमवार १० मे 2027
तुम्ही दिल्ली निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी उत्तर भारत प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना दिल्ली शहरासाठी केली आहे. दिल्ली येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- चतुर्थी (09:03:36 – 06:23:16)
- नक्षत्र
- आर्द्रा (19:59:06 – 18:08:06)
- योग
- धृती (23:19:38 – 20:05:54)
- करण
- विष्टी (19:43:06 – 06:23:16)
- वार
- सोमवार (05:34:12 – 05:33:31)
- महिना (अमांत)
- वैशाख
- महिना (पौर्णिमांत)
- वैशाख
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- वसंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- प्लवंग
- संवत
- विक्रम संवत 2084, शक संवत 1949
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढती चंद्रकोर
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- १६%
- चंद्र राशी
- मिथुन
- सूर्य रास
- मेष
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- रिक्ता तिथी
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष |
सण आणि व्रते
श्री आद्य शंकराचार्य जयंतीमुहूर्त: – वैशाख शुक्ल पंचमीला स्मार्त हिंदू परंपरेत आद्य शंकराचार्यांची जयंती पाळली जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- रिक्ता तिथी
- विष्टी करण