पंचांग
जयपूर पंचांग, गुरुवार २० मे 2027
तुम्ही जयपूर निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी उत्तर भारत प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना दिल्ली शहरासाठी केली आहे. जयपूर येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- पौर्णिमा (16:03:14 – 16:28:53)
- नक्षत्र
- विशाखा (12:18:52 – 13:20:45)
- योग
- परिघ (22:59:17 – 22:25:22)
- करण
- बव (04:12:34 – 16:28:53)
- वार
- गुरुवार (05:28:16 – 05:27:47)
- महिना (अमांत)
- वैशाख
- महिना (पौर्णिमांत)
- वैशाख
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- वसंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- प्लवंग
- संवत
- विक्रम संवत 2084, शक संवत 1949
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- पौर्णिमा
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- १००%
- चंद्र राशी
- तूळ, पर्यंत
- सूर्य रास
- वृषभ
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ |
सण आणि व्रते
बुद्ध पौर्णिमामुहूर्त: – वैशाख शुक्ल पौर्णिमेला गौतम बुद्धांच्या जन्म, ज्ञानप्राप्ती आणि महापरिनिर्वाणाचे स्मरण करणारा बौद्ध सण.
पौर्णिमामुहूर्त: – हिंदू पंचांगानुसार प्रत्येक शुक्ल पक्षाच्या शेवटच्या दिवशी येणारी ही तिथी आहे. या दिवशी चंद्र पूर्ण कलांनी युक्त असतो.
वैशाख स्नान समाप्तीमुहूर्त: – वैशाख शुक्ल पौर्णिमेला सकाळी वैशाख महिन्यातील नित्य स्नानाची सांगता केली जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- पूर्णा तिथी
- परिघ योग