पंचांग
लंडन पंचांग, गुरुवार २१ जानेवारी 2027
या पानावरील वेळा आणि तिथी लंडन शहरासाठी आहेत.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- चतुर्दशी (19:41:57 – 16:00:22)
- नक्षत्र
- आर्द्रा (10:47:04 – 07:53:51)
- योग
- वैधृती (16:52:51 – 12:37:44)
- करण
- वणिज (05:52:00 – 16:00:22)
- वार
- गुरुवार (07:53:48 – 07:52:40)
- महिना (अमांत)
- पौष
- महिना (पौर्णिमांत)
- पौष
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- हेमंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1949/1948, विक्रम संवत 2084/2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- पौर्णिमा
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ९८%
- चंद्र राशी
- मिथुन, पर्यंत
- सूर्य रास
- मकर
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- अशुभ योग
- –
- रिक्ता तिथी
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- रवि योग
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर |
सण आणि व्रते
गुरु पुष्यामृत योगमुहूर्त: – गुरुवारी पुष्य नक्षत्र असताना येणारा हा एक शुभ योग आहे.
भारतीय राष्ट्रीय माघ महिना सुरूभारतीय राष्ट्रीय दिनदर्शिकेनुसार माघ या महिन्याची सुरुवात.
शाकंभरी नवरात्रमुहूर्त: – पौष शुक्ल अष्टमीपासून पौर्णिमेपर्यंत शाकंभरी देवीची उपासना केली जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- रिक्ता तिथी
- वैधृती योग
- विष्टी करण
- वार-नक्षत्र योग