पंचांग
मेलबर्न पंचांग, सोमवार २३ नोव्हेंबर 2026
या पानावरील वेळा आणि तिथी मेलबर्न शहरासाठी आहेत.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- त्रयोदशी (10:26:51 – 08:07:28)
- नक्षत्र
- अश्विनी (11:24:44 – 09:45:30)
- योग
- वरीयान (04:59:09 – 01:28:08)
- करण
- तैतिल (21:22:11 – 08:07:28)
- वार
- सोमवार (05:55:05 – 05:54:35)
- महिना (अमांत)
- कार्तिक
- महिना (पौर्णिमांत)
- कार्तिक
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- शरद
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढता चंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ९५%
- चंद्र राशी
- मेष
- सूर्य रास
- वृश्चिक
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- गंडमूळ
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक |
सण आणि व्रते
तुळशी विवाहमुहूर्त: – कार्तिक शुक्ल द्वादशीला तुळशी (वृंदा) व शालिग्राम (विष्णू) यांच्या विवाह सोहळ्याचे आचरण; पौर्णिमेपर्यंत सुरू राहणाऱ्या या उत्सवाची सुरुवात.
वैकुंठ चतुर्दशीमुहूर्त: – कार्तिक शुक्ल चतुर्दशीला भगवान विष्णू आणि शिव यांच्या एकत्रित पूजनाचे हे व्रत आहे.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- विष्टी करण
- गंडमूळ