पंचांग
नांदेड पंचांग, शनिवार १३ फेब्रुवारी 2027
तुम्ही नांदेड निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी महाराष्ट्र प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना मुंबई शहरासाठी केली आहे. नांदेड येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- सप्तमी (02:59:41 – 02:07:08)
- नक्षत्र
- भरणी (05:55:53 – 05:37:17)
- योग
- शुक्ल (19:01:59 – 17:18:12)
- करण
- गर (02:59:40 – 14:37:36)
- वार
- शनिवार (07:08:03 – 07:07:32)
- महिना (अमांत)
- माघ
- महिना (पौर्णिमांत)
- माघ
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- शिशिर
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्र कला
- वाढता अर्धचंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ३६%
- चंद्र राशी
- मेष
- सूर्य रास
- मकर
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- विदल तिथी
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर |
सण आणि व्रते
रथसप्तमीमुहूर्त: – माघ शुक्ल सप्तमीला सूर्याची उपासना करण्याचा हा दिवस आहे.
महर्षी नवल जयंतीमुहूर्त: – माघ शुक्ल सप्तमीला महाराष्ट्रात महर्षी नवल यांची जयंती साजरी केली जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- विष्टी करण