पंचांग
नांदेड पंचांग, रविवार ४ एप्रिल 2027
तुम्ही नांदेड निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी महाराष्ट्र प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना मुंबई शहरासाठी केली आहे. नांदेड येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- त्रयोदशी (04:26:54 – 05:23:31)
- नक्षत्र
- शततारका (14:41:27 – 16:32:51)
- योग
- शुभ (10:09:48 – 10:13:13)
- करण
- गर (04:26:54 – 17:00:08)
- वार
- रविवार (06:30:26 – 06:29:36)
- महिना (अमांत)
- फाल्गुन
- महिना (पौर्णिमांत)
- चैत्र
- पक्ष
- कृष्ण
- ऋतू
- शिशिर
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948/1949, विक्रम संवत 2083/2084
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- घटती चंद्रकोर
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ९%
- चंद्र राशी
- कुंभ
- सूर्य रास
- मीन
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- पंचक
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन |
सण आणि व्रते
प्रदोषमुहूर्त: – प्रत्येक पक्षाच्या त्रयोदशीला संध्याकाळी शिवाची उपासना.
मधुकृष्ण त्रयोदशीमुहूर्त: – फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशीला साजरी होणारी ही एक स्मार्त हिंदू परंपरेतील व्रत-तिथी आहे.
वरुणी योगमुहूर्त: – फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशीला शततारका नक्षत्र असताना हा योग येतो. हा एक पंचांगीय योग असून या काळात दान-धर्म करण्याचे महत्त्व सांगितले जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- विष्टी करण
- पंचक