पंचांग
नाशिक पंचांग, गुरुवार ४ फेब्रुवारी 2027
तुम्ही नाशिक निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी महाराष्ट्र प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना मुंबई शहरासाठी केली आहे. नाशिक येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- त्रयोदशी (13:50:36 – 16:31:41)
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढा (12:25:54 – 15:32:08)
- योग
- वज्र (18:44:05 – 19:41:05)
- करण
- वणिज (03:11:33 – 16:31:41)
- वार
- गुरुवार (07:11:52 – 07:11:31)
- महिना (अमांत)
- पौष
- महिना (पौर्णिमांत)
- माघ
- पक्ष
- कृष्ण
- ऋतू
- हेमंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- घटती चंद्रकोर
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ६%
- चंद्र राशी
- धनू, पर्यंत
- सूर्य रास
- मकर
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर |
सण आणि व्रते
मासिक शिवरात्रमुहूर्त: – प्रत्येक महिन्याच्या कृष्ण पक्षातील चतुर्दशीला भगवान शिवाची उपासना करण्याचा हा दिवस आहे.
मेरू त्रयोदशी (जैन)मुहूर्त: – जैन परंपरेत पौष कृष्ण त्रयोदशीला मेरू पर्वताचे पूजन करून साजरी केली जाणारी एक तिथी.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- वज्र योग
- विष्टी करण