पंचांग
नवी मुंबई पंचांग, मंगळवार २ फेब्रुवारी 2027
तुम्ही नवी मुंबई निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी महाराष्ट्र प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना मुंबई शहरासाठी केली आहे. नवी मुंबई येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- एकादशी (08:41:36 – 11:10:38)
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा (06:27:37 – 09:21:15)
- योग
- व्याघात (16:55:39 – 17:46:45)
- करण
- बालव (21:54:06 – 11:10:38)
- वार
- मंगळवार (07:12:31 – 07:12:12)
- महिना (अमांत)
- पौष
- महिना (पौर्णिमांत)
- माघ
- पक्ष
- कृष्ण
- ऋतू
- हेमंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- घटती चंद्रकोर
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- १८%
- चंद्र राशी
- वृश्चिक, पर्यंत
- सूर्य रास
- मकर
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- गंडमूळ
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर |
सण आणि व्रते
संत निवृत्तिनाथ यात्रामुहूर्त: – त्र्यंबकेश्वर येथील संत निवृत्तिनाथांच्या समाधीस्थळी भरणारी वार्षिक यात्रा.
षट्तिला एकादशीमुहूर्त: – पौष कृष्ण एकादशीला षट्तिला एकादशी म्हणतात. या दिवशी तीळ वापरून सहा प्रकारे दान, स्नान व भोजन करण्याचे महत्त्व आहे.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- व्याघात योग
- गंडमूळ