पंचांग
न्यूयॉर्क पंचांग, शुक्रवार १५ जानेवारी 2027
या पानावरील वेळा आणि तिथी न्यूयॉर्क शहरासाठी आहेत.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- अष्टमी (03:43:50 – 03:13:21)
- नक्षत्र
- रेवती (12:48:34 – 13:20:51)
- योग
- सिद्ध (05:47:33 – 04:08:10)
- करण
- विष्टी (03:43:50 – 15:34:22)
- वार
- शुक्रवार (07:17:58 – 07:17:33)
- महिना (अमांत)
- पौष
- महिना (पौर्णिमांत)
- पौष
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- हेमंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1949/1948, विक्रम संवत 2084/2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्र कला
- वाढता अर्धचंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ४६%
- चंद्र राशी
- मीन, पर्यंत
- सूर्य रास
- मकर
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- दग्ध तिथी
- –
- गंडमूळ
- –
- पंचक
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- अमृत सिद्धी योग
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू |
सण आणि व्रते
दुर्गाष्टमीमुहूर्त: – प्रत्येक मासातील शुक्ल पक्षातील अष्टमीला देवी दुर्गेचे व्रत केले जाते.
संक्रांत करिदिनमकर संक्रांतीच्या दुसऱ्या दिवशी स्मार्त हिंदूंमध्ये पाळला जाणारा करिदिन.
शाकंभरी नवरात्रमुहूर्त: – पौष शुक्ल अष्टमीपासून पौर्णिमेपर्यंत शाकंभरी देवीची उपासना केली जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- विष्टी करण
- गंडमूळ
- पंचक
- वार-नक्षत्र योग