पंचांग
पणजी पंचांग, बुधवार १४ एप्रिल 2027
तुम्ही पणजी निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी गोवा प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना पणजी शहरासाठी केली आहे. पणजी येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- अष्टमी (17:29:17 – 15:24:08)
- नक्षत्र
- पुनर्वसु (12:12:46 – 10:52:01)
- योग
- सुकर्मा (13:58:31 – 11:09:37)
- करण
- बव (04:26:31 – 15:24:08)
- वार
- बुधवार (06:21:16 – 06:20:37)
- महिना (अमांत)
- चैत्र
- महिना (पौर्णिमांत)
- चैत्र
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- वसंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- प्लवंग
- संवत
- शक संवत 1948/1949, विक्रम संवत 2083/2084
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढता अर्धचंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ५१%
- चंद्र राशी
- कर्क
- सूर्य रास
- मीन
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन |
सण आणि व्रते
आंबेडकर जयंतीडॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांची जयंती; महाराष्ट्रात व राष्ट्रीय स्तरावर सुट्टी.
बैसाखीमुहूर्त: – सूर्य मेष राशीत प्रवेश करतो तो दिवस; पंजाब आणि शीख परंपरेत नववर्ष आणि कापणीचा सण.
भवानीदेवी उत्पत्तीमुहूर्त: – चैत्र शुक्ल अष्टमीला महाराष्ट्रात भवानीदेवीची उत्पत्ती मानली जाते.
चैत्र नवरात्रमुहूर्त: – चैत्र शुक्ल प्रतिपदेपासून सुरू होणारा नऊ दिवसांचा कालावधी; या काळात देवीची उपासना केली जाते.
दुर्गाष्टमीमुहूर्त: – प्रत्येक मासातील शुक्ल पक्षातील अष्टमीला देवी दुर्गेचे व्रत केले जाते.
आयंबिल ओळी (जैन)मुहूर्त: – जैन परंपरेतील आयंबिल तपाची ओळी चैत्र शुक्ल सप्तमीला सुरू होते.