पंचांग
पुणे पंचांग, शुक्रवार २२ जानेवारी 2027
तुम्ही पुणे निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी महाराष्ट्र प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना मुंबई शहरासाठी केली आहे. पुणे येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- पौर्णिमा (21:30:22 – 17:47:15)
- नक्षत्र
- पुनर्वसु (13:23:51 – 10:24:58)
- योग
- विष्कंभ (18:07:44 – 13:49:58)
- करण
- विष्टी (21:30:22 – 07:38:20)
- वार
- शुक्रवार (07:14:38 – 07:14:33)
- महिना (अमांत)
- पौष
- महिना (पौर्णिमांत)
- पौष
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- हेमंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1949/1948, विक्रम संवत 2084/2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- पौर्णिमा
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- १००%
- चंद्र राशी
- कर्क
- सूर्य रास
- मकर
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर |
सण आणि व्रते
पौर्णिमामुहूर्त: – हिंदू पंचांगानुसार प्रत्येक शुक्ल पक्षाच्या शेवटच्या दिवशी येणारी ही तिथी आहे. या दिवशी चंद्र पूर्ण कलांनी युक्त असतो.
राजमाता जिजाऊ जयंतीमुहूर्त: – छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या मातोश्री राजमाता जिजाऊ यांची जयंती पौष शुक्ल पौर्णिमेला साजरी केली जाते.
माघ-स्नान प्रारंभमुहूर्त: – पौष शुक्ल पौर्णिमेपासून माघ महिन्यातील पवित्र स्नानांचा प्रारंभ होतो.
शाकंभरी नवरात्रमुहूर्त: – पौष शुक्ल अष्टमीपासून पौर्णिमेपर्यंत शाकंभरी देवीची उपासना केली जाते.
शाकंभरी पौर्णिमामुहूर्त: – पौष शुक्ल पौर्णिमेला शाकंभरी देवीची पूजा करून तिच्या कृपेचे स्मरण केले जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- पूर्णा तिथी
- विष्कंभ योग
- विष्टी करण