पंचांग
सातारा पंचांग, रविवार २२ नोव्हेंबर 2026
तुम्ही सातारा निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी महाराष्ट्र प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना मुंबई शहरासाठी केली आहे. सातारा येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- त्रयोदशी (04:56:51 – 02:37:28)
- नक्षत्र
- अश्विनी (05:54:44 – 04:15:30)
- योग
- व्यतिपात (02:30:20 – 23:29:09)
- करण
- कौलव (04:56:51 – 15:52:11)
- वार
- रविवार (06:49:47 – 06:50:22)
- महिना (अमांत)
- कार्तिक
- महिना (पौर्णिमांत)
- कार्तिक
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- शरद
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढता चंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ९१%
- चंद्र राशी
- मेष
- सूर्य रास
- वृश्चिक
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- गंडमूळ
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक |
सण आणि व्रते
तुळशी विवाहमुहूर्त: – कार्तिक शुक्ल द्वादशीला तुळशी (वृंदा) व शालिग्राम (विष्णू) यांच्या विवाह सोहळ्याचे आचरण; पौर्णिमेपर्यंत सुरू राहणाऱ्या या उत्सवाची सुरुवात.
प्रदोषमुहूर्त: – प्रत्येक पक्षाच्या त्रयोदशीला संध्याकाळी शिवाची उपासना.
वैकुंठ चतुर्दशी उपवासकार्तिक शुक्ल चतुर्दशीला वैकुंठ चतुर्दशीच्या दिवशी स्मार्त हिंदूंकडून पाळला जाणारा उपवास.
श्री गोरक्षनाथ प्रकट दिनमुहूर्त: – नाथ संप्रदायाचे प्रमुख गुरू श्री गोरक्षनाथ यांचा प्रकट दिन.
भारतीय राष्ट्रीय अग्रहायण महिना सुरूभारतीय राष्ट्रीय दिनदर्शिकेनुसार अग्रहायण या महिन्याची सुरुवात.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- व्यतिपात योग
- गंडमूळ