पंचांग
सातारा पंचांग, शुक्रवार १ जानेवारी 2027
तुम्ही सातारा निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी महाराष्ट्र प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना मुंबई शहरासाठी केली आहे. सातारा येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- नवमी (12:32:48 – 13:10:25)
- नक्षत्र
- चित्रा (16:13:16 – 17:29:21)
- योग
- अतिगंड (12:26:02 – 11:43:08)
- करण
- गर (00:46:41 – 13:10:25)
- वार
- शुक्रवार (07:11:40 – 07:12:00)
- महिना (अमांत)
- मार्गशीर्ष
- महिना (पौर्णिमांत)
- पौष
- पक्ष
- कृष्ण
- ऋतू
- हेमंत
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- प्लवंग
- संवत
- शक संवत 1949/1948, विक्रम संवत 2084/2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- घटता अर्धचंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ३७%
- चंद्र राशी
- तूळ
- सूर्य रास
- धनू
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
- अशुभ योग
- –
- रिक्ता तिथी
- –
- विदल तिथी
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू |
सण आणि व्रते
ख्रिस्ती नवीन वर्षारंभख्रिस्ती परंपरेनुसार नवीन वर्षाच्या पहिल्या दिवशी हा दिवस साजरा केला जातो.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- रिक्ता तिथी
- अतिगंड योग
- विष्टी करण