पंचांग
सातारा पंचांग, गुरुवार १८ फेब्रुवारी 2027
तुम्ही सातारा निवडले आहे. या पानावरील वेळा आणि तिथी महाराष्ट्र प्रदेशासाठी आहेत; त्यांची गणना मुंबई शहरासाठी केली आहे. सातारा येथे वेळा वेगळ्या असू शकतात, आणि एखादा सण दुसऱ्या दिवशी येऊ शकतो.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- द्वादशी (17:32:12 – 14:28:03)
- नक्षत्र
- पुनर्वसु (23:28:56 – 21:05:33)
- योग
- आयुष्मान (02:37:20 – 22:50:13)
- करण
- बालव (04:01:46 – 14:28:03)
- वार
- गुरुवार (07:05:20 – 07:04:44)
- महिना (अमांत)
- माघ
- महिना (पौर्णिमांत)
- माघ
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- शिशिर
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढता चंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ८८%
- चंद्र राशी
- मिथुन, पर्यंत
- सूर्य रास
- कुंभ
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ |
सण आणि व्रते
प्रदोषमुहूर्त: – प्रत्येक पक्षाच्या त्रयोदशीला संध्याकाळी शिवाची उपासना.
सौर वसंत ऋतू सुरूमुहूर्त: – सूर्य मीन राशीत प्रवेश करतो तेव्हा सौर पद्धतीनुसार वसंत ऋतू सुरू होतो.
भीष्म द्वादशीमुहूर्त: – महाभारतातील भीष्म पितामहांच्या स्मरणार्थ माघ शुक्ल द्वादशीला हे व्रत केले जाते.
गुरु पुष्यामृत योगमुहूर्त: – गुरुवारी पुष्य नक्षत्र असताना येणारा हा एक शुभ योग आहे.