पंचांग
सिंगापूर पंचांग, सोमवार १९ एप्रिल 2027
या पानावरील वेळा आणि तिथी सिंगापूर शहरासाठी आहेत.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- त्रयोदशी (10:12:30 – 08:38:44)
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी (08:35:32 – 07:44:46)
- योग
- व्याघात (00:27:33 – 22:13:52)
- करण
- तैतिल (21:23:51 – 08:38:43)
- वार
- सोमवार (06:59:34 – 06:59:18)
- महिना (अमांत)
- चैत्र
- महिना (पौर्णिमांत)
- चैत्र
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- वसंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- प्लवंग
- संवत
- शक संवत 1948/1949, विक्रम संवत 2083/2084
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढता चंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ९५%
- चंद्र राशी
- कन्या
- सूर्य रास
- मेष
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष |
सण आणि व्रते
महावीर जयंतीमुहूर्त: – जैन धर्माचे चोविसावे तीर्थंकर भगवान महावीर यांची जयंती.
हनुमान जन्मोत्सव उपवासहनुमान जयंतीच्या आदल्या दिवशी काही स्मार्त परंपरांत पाळला जाणारा उपवास.
आयंबिल ओळी (जैन)मुहूर्त: – जैन परंपरेतील आयंबिल तपाची ओळी चैत्र शुक्ल सप्तमीला सुरू होते.
अनंग त्रयोदशीमुहूर्त: – चैत्र शुक्ल त्रयोदशीला कामदेवाची पूजा करून प्रेम आणि सौंदर्याची कामना केली जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- व्याघात योग