पंचांग
टोरोंटो पंचांग, रविवार २० डिसेंबर 2026
या पानावरील वेळा आणि तिथी टोरोंटो शहरासाठी आहेत.
या सणांच्या तारखा अजून छापील पंचांगाशी पडताळून पाहिलेल्या नाहीत.
पंचांगाची पाच अंगे आणि महिना
- तिथी
- एकादशी (11:39:43 – 09:44:56)
- नक्षत्र
- भरणी (04:25:33 – 02:38:37)
- योग
- शिव (21:39:33 – 18:36:49)
- करण
- विष्टी (22:48:14 – 09:44:56)
- वार
- रविवार (07:47:19 – 07:47:50)
- महिना (अमांत)
- मार्गशीर्ष
- महिना (पौर्णिमांत)
- मार्गशीर्ष
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतू
- हेमंत
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्यान्ह
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- वाढता चंद्र
- चंद्राचा प्रकाशित भाग
- ८३%
- चंद्र राशी
- मेष
- सूर्य रास
- धनू
राहुकाळ आणि टाळायच्या वेळा
- राहू काळ
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काळ
- –
- भद्रा
- –
शुभ वेळा
- अभिजित मुहूर्त
- –
- आनंदादी योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूली मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघडिया
दिवस
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग |
रात्र
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काळ | ||
| शुभ |
होरा
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनी | ||
| गुरू | ||
| मंगळ | ||
| रवी | ||
| शुक्र | ||
| बुध |
लग्न
| नाव | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| धनू | ||
| मकर | ||
| कुंभ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तूळ | ||
| वृश्चिक | ||
| धनू |
सण आणि व्रते
मोक्षदा एकादशीमुहूर्त: – मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी. भगवान विष्णूंची उपासना करून मोक्षप्राप्तीची कामना केली जाते.
मौनी एकादशी (जैन)मुहूर्त: – मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशीला जैन धर्मीय मौन व उपवास धारण करून ध्यानसाधना करतात.
गीता जयंतीमुहूर्त: – मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशीला भगवद्गीतेचा जन्मदिवस म्हणून ही जयंती साजरी केली जाते.
आज लक्षात घेण्यासारखे
- विष्टी करण