पंचांग
बेंगलुरु का पंचांग, शनिवार २० फ़रवरी 2027
आपने बेंगलुरु चुना है। इस पेज पर दिए समय और तारीखें कर्नाटक क्षेत्र के लिए हैं, जिनकी गणना बेंगलुरु के लिए की गई है। बेंगलुरु में समय अलग हो सकता है, और कोई त्योहार किसी दूसरे दिन पड़ सकता है।
त्योहारों की इन तारीखों का मिलान अभी किसी छपे हुए पंचांग से नहीं किया गया है।
पंचांग के पाँच अंग और मास
- तिथि
- चतुर्दशी (11:14:39 – 08:00:13)
- नक्षत्र
- आश्लेषा (18:35:31 – 16:07:32)
- योग
- शोभन (18:58:12 – 15:08:01)
- करण
- वणिज (21:37:02 – 08:00:13)
- वार
- शनिवार (06:40:13 – 06:39:46)
- मास (अमांत)
- माघ
- मास (पूर्णिमांत)
- माघ
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतु
- शिशिर
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्याह्न
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- पूर्णिमा
- चंद्रमा का प्रकाशित भाग
- ९९%
- चंद्र राशि
- कर्क, तक
- सूर्य राशि
- कुम्भ
राहुकाल और टालने योग्य समय
- राहु काल
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काल
- –
- भद्रा
- –
- गंड मूल
- –
- रिक्ता तिथि
- –
शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त
- –
- आनंदादि योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूलि मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- रवि योग
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघड़िया
दिन
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल |
रात्रि
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ |
होरा
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल |
लग्न
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| कुम्भ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तुला | ||
| वृश्चिक | ||
| धनु | ||
| मकर | ||
| कुम्भ |
त्योहार और व्रत
चंद्र ग्रहणमुहूर्त: – चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसमें पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस समय सूतक माना जाता है और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन किया जाता है।
पूर्णिमामुहूर्त: – प्रत्येक मास की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि, जो चंद्रमा के पूर्ण होने का दिन मानी जाती है।
गुरु रविदास जयंतीमुहूर्त: – सिख संत गुरु रविदास जी का जन्मोत्सव माघ शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है।
भारतीय राष्ट्रीय फाल्गुन आरंभभारत के राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार एक नए सौर मास का पहला दिन।
माघ पूर्णिमामुहूर्त: – माघ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।
माघ स्नान समाप्तमुहूर्त: – माघ मास में प्रतिदिन किए जाने वाले पवित्र स्नान का अंतिम दिन, जो पूर्णिमा पर होता है।
आज ध्यान देने योग्य
- रिक्ता तिथि
- विष्टि करण
- गंड मूल
- वार-नक्षत्र योग