सारे शब्द, अ से ज्ञ तक
- अमावस्या (Amavasya)
- चंद्र मास की वह तिथि जब चंद्रमा और सूर्य आकाश में साथ होते हैं, और चंद्रमा दिखाई नहीं देता। अमावस्या की तारीख़ें देखें।
- अयनांश (Ayanamsa)
- पश्चिमी ज्योतिष के सायन राशिचक्र और वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र के बीच का अंतर, अंशों में। इस साइट पर राशि और नक्षत्र लाहिड़ी अयनांश से निकाले जाते हैं; ऐसा क्यों, यह हम गणना कैसे करते हैं में लिखा है।
- आरती (Aarti)
- पूजा के अंत में देवता के सामने जलता दीपक घुमाया जाता है, यही आरती है; उस समय जो गीत गाया जाता है, उसे भी आरती ही कहते हैं। आरती, स्तोत्र और चालीसा के पाठ ज्ञान केंद्र में एक ही जगह मिलते हैं।
- ईशान (Ishan)
- उत्तर-पूर्व दिशा, यानी ईशान कोण। वास्तु में इसे घर या दुकान का सबसे शुभ कोना माना जाता है, और परंपरा से पूजा घर यहीं बनाया जाता है और पवित्र वस्तुएँ यहीं रखी जाती हैं।
- उपाय (Upaya)
- वैदिक ज्योतिष में, कुंडली में कमज़ोर या पीड़ित ग्रह के लिए परंपरा जो साधना सुझाती है: उस ग्रह का मंत्र, दान, उसके दिन का व्रत, या उसका यंत्र। उपाय भक्ति से किया जाता है, किसी तय फल के वादे के रूप में कभी नहीं।
- कुंडली (Kundali)
- जन्म कुंडली: जन्म के समय और स्थान के लिए बनाया गया वैदिक ज्योतिष का चार्ट। परंपरा में इससे जीवन की दिशा पढ़ी जाती है, और यह भी कि कौन-सा दौर कब आता है। अंग्रेज़ी में पढ़ें: Birth date astrology: the kundali।
- गायत्री (Gayatri)
- गायत्री माता, वैदिक मंत्रों की जननी: ऋग्वेद के गायत्री मंत्र को ही देवी के रूप में गायत्री माता कहा जाता है। परंपरा में वे बुद्धि, प्रकाश और सही विवेक के लिए पूजी जाती हैं, और विद्यार्थी उनका यंत्र पढ़ाई की मेज़ पर रखते हैं।
- ग्रह (Graha)
- वैदिक ज्योतिष में आकाश का कोई पिंड या प्रभाव, जिसे कुंडली में पढ़ा जाता है। नौ ग्रह मिलकर नवग्रह कहलाते हैं।
- चालीसा (Chalisa)
- किसी देवता की स्तुति में चालीस चौपाइयों की भक्ति-रचना, जैसे हनुमान चालीसा।
- चौघड़िया (Choghadiya)
- दिन और रात, दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटने का पारंपरिक तरीक़ा। हर भाग का अपना नाम है, और रिवाज़ से कुछ भाग किसी काम की शुरुआत के लिए अच्छे माने जाते हैं और कुछ नहीं। मुंबई का आज का चौघड़िया देखें।
- जप (Japa)
- किसी मंत्र को बार-बार दोहराना, जिसकी गिनती अक्सर 108 मनकों की माला पर होती है।
- तिथि (Tithi)
- चंद्र दिन: वह समय जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° और आगे बढ़ जाता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। परिवार के जन्मदिन और श्राद्ध अक्सर तिथि के हिसाब से होते हैं, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर में उनकी तारीख़ हर साल बदलती है।
- दशा (Dasha)
- वैदिक ज्योतिष में किसी ग्रह का काल, जिसमें माना जाता है कि वह ग्रह जीवन की घटनाओं पर अपनी छाप छोड़ता है। महादशा बड़ा काल है; अंतर्दशा उसके भीतर का छोटा काल।
- दीया (Diya)
- मिट्टी या धातु का छोटा दीपक, जिसमें घी या तेल डालकर पूजा में जलाया जाता है। कार्ड की शुरुआत के सात चरणों में, तीसरे चरण में घी का एक छोटा दीया जलाया जाता है।
- देवघर (Devghar)
- घर के मंदिर के लिए मराठी शब्द: वह जगह जहाँ परिवार अपने देवताओं को रखता है और रोज़ पूजा करता है। अक्सर इसमें लकड़ी का एक छोटा मंदिर होता है, जिसे मराठी में देव्हारा कहते हैं। हिंदी बोलने वाले घरों में इसे पूजा घर कहते हैं।
- दोष (Dosha)
- वैदिक ज्योतिष में, कुंडली का वह योग जिसे परंपरा एक कठिनाई के रूप में पढ़ती है, जैसे मंगल दोष या पितृ दोष। परंपरा इसका सामना भक्ति से करती है, उपाय के ज़रिए; उपाय एक साधना है, किसी तय फल का वादा कभी नहीं।
- नक्षत्र (Nakshatra)
- वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में से एक: राशिचक्र के 13°20′ के बराबर हिस्से, और हर एक का नाम किसी तारा-समूह पर। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वह जन्म नक्षत्र है, और परंपरा में बच्चे का नाम उसी नक्षत्र के अक्षर से शुरू होता है। सारे 27 नक्षत्र देखें।
- वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रह: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु। नवग्रह और उनके यंत्र देखें।
- पूजा (Puja)
- देवता की आराधना: मंत्रों के साथ दीप, फूल और जल अर्पित करना, अपने पूजा घर में या मंदिर में। हर भाग्य कार्ड को भेजने से पहले हम पुणे में वैदिक पूजा से अभिमंत्रित करते हैं।
- पूजा घर (Puja ghar)
- वह कमरा, कोना या अलमारी जहाँ परिवार अपने देवताओं को रखता है और रोज़ पूजा करता है। बहुत से लोग इसे घर का मंदिर भी कहते हैं, और मराठी घरों में इसे देवघर कहते हैं। आपका भाग्य कार्ड यहाँ भी रह सकता है, और पर्स में आपके साथ भी।
- पूर्णिमा (Purnima)
- वह तिथि जब चंद्रमा पूरा दिखता है। पूर्णिमा की तारीख़ें देखें।
- पंचांग (Panchang)
- हिंदू परंपरा का दैनिक कैलेंडर, जो हर दिन के पाँच अंग बताता है (पंच-अंग, इसी से नाम पंचांग): तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इस साइट का पंचांग हम ख़ुद निकालते हैं, हर शहर के लिए अलग। आज का पंचांग देखें।
- प्राण प्रतिष्ठा (Pran Pratishtha)
- इसका शाब्दिक अर्थ है “प्राण की स्थापना”। मंदिर और घर की परंपरा में यह वह विधि है जिससे किसी मूर्ति या यंत्र में देवता का आवाहन करके उसे पूजा के लिए स्थापित किया जाता है। इसके बाद परंपरा उस मूर्ति या यंत्र को देवता का अपना आसन मानती है।
- बिंदु (Bindu)
- यंत्र के ठीक बीच का बिंदु। परंपरा में यह देवता का आसन है, वह बीज जिससे पूरा चित्र फैलता है, और वह जगह जहाँ नज़र बार-बार लौट आती है।
- बीज मंत्र (Bija mantra)
- एक “बीज” अक्षर: छोटा, अक्सर एक ही ध्वनि का, जिसमें परंपरा के अनुसार किसी देवता का सार समाया होता है। श्रीं महालक्ष्मी का बीज है, और ऐं सरस्वती का। हर भाग्य कार्ड के लिफ़ाफ़े में एक विधि कार्ड होता है, और उस पर उस कार्ड का बीज मंत्र छपा होता है।
- महालक्ष्मी (Mahalaxmi)
- देवी महालक्ष्मी, भगवान विष्णु की अर्धांगिनी, जिन्हें परंपरा में समृद्धि, वैभव और गरिमा की देवी माना जाता है। दिवाली की रात परिवार उनका घर में स्वागत करते हैं। उनका बीज श्रीं है।
- माला (Mala)
- मंत्र की गिनती के लिए 108 मनकों की लड़ी। माला का एक पूरा फेरा, यानी 108 बार, जप की पारंपरिक इकाई है। सिरे का बड़ा मनका, सुमेरु, गिनती में कभी लाँघा नहीं जाता।
- मुहूर्त (Muhurat)
- समय की वह घड़ी जिसे परंपरा किसी काम की शुरुआत के लिए शुभ मानती है। समय की इकाई के रूप में एक मुहूर्त 48 मिनट का होता है, यानी एक दिन-रात का तीसवाँ हिस्सा।
- मंत्र (Mantra)
- एक पवित्र ध्वनि, अक्षर या श्लोक, जिसे जप में दोहराया जाता है या पूजा में पढ़ा जाता है, ताकि मन देवता पर टिका रहे। वैदिक परंपरा में गायत्री मंत्र सबसे ज़्यादा जपे जाने वाले मंत्रों में से एक है।
- यंत्र (Yantra)
- एक बिंदु के चारों ओर त्रिकोणों, वृत्तों और कमल-दलों से बना पवित्र चित्र, जिसे ध्यान, मंत्र और भक्ति की साधना में मन टिकाने के लिए रखा जाता है। परंपरा में हर यंत्र किसी एक देवता का रेखाओं में बना रूप है, और उसी देवता के मंत्र के साथ रखा जाता है। यंत्र की शुरुआत कैसे करें, यह भी ज़रूर पढ़ें।
- राशि (Rashi)
- वैदिक (निरयण) राशिचक्र की 12 राशियों में से एक, हर राशि 30° की, मेष से मीन तक। भारत में किसी की राशि का मतलब आमतौर पर वह राशि होता है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, यानी चंद्र राशि। राशि के अनुसार यंत्र देखें।
- राहु काल (Rahu kaal)
- लगभग डेढ़ घंटे का वह समय जो हर दिन आता है, हर वार को अलग समय पर। रिवाज़ से इस समय कोई नया काम शुरू नहीं किया जाता, पर जो काम पहले से चल रहा है वह चलता रहता है। मुंबई का आज का राहु काल देखें।
- रुद्राक्ष (Rudraksha)
- रुद्राक्ष के पेड़ (Elaeocarpus ganitrus) का बीज, जो भगवान शिव से जुड़ा है, और जिसे मंत्र की गिनती के लिए माला में पिरोया जाता है। दोनों की तुलना यंत्र या रुद्राक्ष में पढ़ें।
- श्री यंत्र (Sri Yantra)
- परंपरा में इसे सारे यंत्रों की जननी कहा जाता है: आपस में गुँथे नौ त्रिकोण, जो बीच के बिंदु के चारों ओर 43 छोटे त्रिकोण बनाते हैं। यह उन देवी का यंत्र है जिन्हें सृष्टि का स्रोत माना जाता है।
- संकल्प (Sankalpa)
- साधना शुरू करने से पहले मन का एक निश्चय, जिसे आप एक वाक्य में कहते हैं: साफ़, वर्तमान काल में, और एक ही। परंपरा में संकल्प ही किसी काम को साधना बनाता है।
- स्तोत्र (Stotra)
- किसी देवता की स्तुति का पाठ, जैसे कनकधारा स्तोत्र या राम रक्षा स्तोत्र।
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