हर राशि का यंत्र कार्ड
बारह में से ग्यारह राशियों का कार्ड या तो स्वामी ग्रह का अपना यंत्र है, या उस देवता का यंत्र जिनकी पूजा परंपरा में उस ग्रह के वार को होती है। नवग्रह वाले पेज पर यही जोड़ियाँ ग्रह के हिसाब से लिखी हैं। अपवाद सिर्फ़ मीन राशि है: उसका कार्ड भक्ति के नाते चुना गया है। हर राशि के नाम पर उसका अपना पेज खुलता है।
| राशि | स्वामी ग्रह | कार्ड | यही कार्ड क्यों |
|---|---|---|---|
| मेष | मंगल | मंगल यंत्र कार्ड | मंगल का अपना यंत्र। |
| वृषभ | शुक्र | महालक्ष्मी यंत्र कार्ड | परंपरा में शुक्रवार शुक्र का वार है, और बहुत से घरों में यही महालक्ष्मी का दिन है। |
| मिथुन | बुध | बुध यंत्र कार्ड | बुध का अपना यंत्र। |
| कर्क | चंद्र | चंद्र यंत्र कार्ड | चंद्र का अपना यंत्र। |
| सिंह | सूर्य | गायत्री यंत्र कार्ड | परंपरा में गायत्री मंत्र सविता देव को, यानी सूर्य को, संबोधित है। |
| कन्या | बुध | बुध यंत्र कार्ड | बुध का अपना यंत्र। |
| तुला | शुक्र | महालक्ष्मी यंत्र कार्ड | परंपरा में शुक्रवार शुक्र का वार है, और बहुत से घरों में यही महालक्ष्मी का दिन है। |
| वृश्चिक | मंगल | मंगल यंत्र कार्ड | मंगल का अपना यंत्र। |
| धनु | गुरु | गायत्री यंत्र कार्ड | परंपरा में गुरु ज्ञान के ग्रह हैं, और गायत्री मंत्र सद्बुद्धि की प्रार्थना है। |
| मकर | शनि | हनुमान यंत्र कार्ड | परंपरा में शनिवार, यानी शनि के वार को, श्री हनुमान की पूजा होती है। |
| कुम्भ | शनि | हनुमान यंत्र कार्ड | परंपरा में शनिवार, यानी शनि के वार को, श्री हनुमान की पूजा होती है। |
| मीन | गुरु | अयोध्या राम मंदिर कार्ड | ग्रह के नाते नहीं, भक्ति के नाते: प्रभु श्रीराम की भक्ति। गुरु की अपनी जोड़ी के लिए गायत्री यंत्र कार्ड, जैसे धनु के लिए। |
मेरी राशि कौन सी है: चंद्र राशि या सूर्य राशि?
चंद्र राशि। वैदिक ज्योतिष में आपकी राशि, यानी जन्म राशि, इससे तय होती है कि आपके जन्म के समय चंद्रमा किस राशि में थे। चंद्रमा हर दो से ढाई दिन में राशि बदलते हैं, इसलिए सिर्फ़ जन्म की तारीख़ से राशि नहीं निकलती: उसके लिए जन्म की तारीख़, समय और जगह, तीनों चाहिए, यानी वही बातें जिनसे कुंडली बनती है। अगर घर वालों ने जन्म के समय आपकी कुंडली बनवाई थी, तो आपकी राशि उसमें लिखी होगी।
अगर आपको सिर्फ़ अपनी सूर्य राशि पता है, तो ध्यान रहे कि वैदिक सूर्य राशि अक्सर पश्चिमी राशि से अलग होती है। दोनों में फ़र्क़ क्यों है और अपनी राशि कैसे पहचानें, यह राशियों वाले पेज पर है।
अगर कुंडली किसी और ग्रह की ओर इशारा करे?
परंपरा में कुंडली की बात राशि से पहले आती है। कुंडली पढ़कर ज्योतिषी किसी ग्रह का नाम लें, या किसी ग्रह की महादशा चल रही हो, तो घरों में राशि के बजाय उसी ग्रह का कार्ड रखा जाता है। महादशा वह लंबा समय है जिसे किसी एक ग्रह का समय माना जाता है। नवग्रह वाले पेज पर नौ ग्रहों में से हर एक का कार्ड लिखा है, राहु और केतु का भी, हालाँकि शास्त्रीय गणना में ये दोनों किसी राशि के स्वामी नहीं हैं।
यंत्र रेखाओं में बना देवता का रूप है, जिसे उसके वार पर, उसके मंत्र के साथ रखा जाता है। आपकी राशि का कार्ड आपकी कुंडली नहीं बदलता, और हम किसी फल का वादा नहीं करते: यह भक्ति के भाव से दिया जाता है।
घरों में राशि का कार्ड कैसे शुरू होता है
परंपरा में कार्ड राशि के स्वामी ग्रह के वार को, सूर्योदय के समय, शुरू किया जाता है; हर राशि के पेज पर उसका वार लिखा है। कार्ड को जल और चुटकी भर हल्दी से शुद्ध किया जाता है, घी का छोटा दीया जलाया जाता है, एक फूल चढ़ाया जाता है, और विधि कार्ड पर छपा मंत्र 108 बार, यानी एक माला, जपा जाता है। फिर संकल्प, यानी मन का एक निश्चय, एक वाक्य में लिया जाता है। इसमें लगभग आधा घंटा लगता है, और पंडित जी की ज़रूरत नहीं होती।
राशि अनुसार यंत्र के बारे में सवाल
क्या हर राशि के लिए कोई कार्ड है?
हाँ। तालिका में बारहों राशियों का एक-एक कार्ड है: जहाँ स्वामी ग्रह का अपना यंत्र है वहाँ वही, जहाँ नहीं है वहाँ उस देवता का यंत्र जिन्हें परंपरा उस ग्रह के साथ रखती है, और मीन के लिए भक्ति का कार्ड।
क्या एक से ज़्यादा यंत्र रख सकते हैं?
हाँ। अगर आपकी राशि और आपका संकल्प अलग-अलग कार्डों की ओर ले जाएँ, तो बहुत से घरों में दोनों रखे जाते हैं, एक पूजा घर में और एक पर्स में। कार्ड चुनने की गाइड में हर संकल्प का कार्ड लिखा है।
क्या राशि का यंत्र मेरी कुंडली बदल देगा?
नहीं। कुंडली आपके जन्म के समय का आकाश है, और कोई यंत्र उसे नहीं बदलता। परंपरा में यंत्र भक्ति के भाव से, उसके मंत्र के साथ रखा जाता है।