पंचांग
बेंगलुरु का पंचांग, रविवार ४ अप्रैल 2027
आपने बेंगलुरु चुना है। इस पेज पर दिए समय और तारीखें कर्नाटक क्षेत्र के लिए हैं, जिनकी गणना बेंगलुरु के लिए की गई है। बेंगलुरु में समय अलग हो सकता है, और कोई त्योहार किसी दूसरे दिन पड़ सकता है।
त्योहारों की इन तारीखों का मिलान अभी किसी छपे हुए पंचांग से नहीं किया गया है।
पंचांग के पाँच अंग और मास
- तिथि
- त्रयोदशी (04:26:54 – 05:23:31)
- नक्षत्र
- शतभिषा (14:41:27 – 16:32:51)
- योग
- शुभ (10:09:48 – 10:13:13)
- करण
- गर (04:26:54 – 17:00:08)
- वार
- रविवार (06:14:15 – 06:13:36)
- मास (अमांत)
- फाल्गुन
- मास (पूर्णिमांत)
- चैत्र
- पक्ष
- कृष्ण
- ऋतु
- शिशिर
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948/1949, विक्रम संवत 2083/2084
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्याह्न
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- घटती चंद्रकला
- चंद्रमा का प्रकाशित भाग
- ९%
- चंद्र राशि
- कुम्भ
- सूर्य राशि
- मीन
राहुकाल और टालने योग्य समय
- राहु काल
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काल
- –
- भद्रा
- –
- पंचक
- –
शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त
- –
- आनंदादि योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूलि मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघड़िया
दिन
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग |
रात्रि
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ |
होरा
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध |
लग्न
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तुला | ||
| वृश्चिक | ||
| धनु | ||
| मकर | ||
| कुम्भ | ||
| मीन |
त्योहार और व्रत
प्रदोषमुहूर्त: – त्रयोदशी तिथि को शिव की उपासना का व्रत।
मधुकृष्ण त्रयोदशीमुहूर्त: – अमान्त फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को स्मार्त परंपरा में मनाया जाने वाला एक व्रत है।
वरुणी योगमुहूर्त: – अमान्त फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी पर शतभिषा नक्षत्र में बनने वाला एक पंचांगीय योग।
आज ध्यान देने योग्य
- विष्टि करण
- पंचक