पंचांग
छत्रपति संभाजीनगर का पंचांग, शुक्रवार ९ अप्रैल 2027
आपने छत्रपति संभाजीनगर चुना है। इस पेज पर दिए समय और तारीखें महाराष्ट्र क्षेत्र के लिए हैं, जिनकी गणना मुंबई के लिए की गई है। छत्रपति संभाजीनगर में समय अलग हो सकता है, और कोई त्योहार किसी दूसरे दिन पड़ सकता है।
त्योहारों की इन तारीखों का मिलान अभी किसी छपे हुए पंचांग से नहीं किया गया है।
पंचांग के पाँच अंग और मास
- तिथि
- तृतीया (03:10:31 – 01:32:16)
- नक्षत्र
- भरणी (17:59:13 – 17:11:02)
- योग
- प्रीति (03:24:55 – 00:58:24)
- करण
- तैतिल (03:10:31 – 14:23:28)
- वार
- शुक्रवार (06:26:21 – 06:25:33)
- मास (अमांत)
- चैत्र
- मास (पूर्णिमांत)
- चैत्र
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतु
- वसंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- प्लवंग
- संवत
- शक संवत 1948/1949, विक्रम संवत 2083/2084
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्याह्न
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- बढ़ती चंद्रकला
- चंद्रमा का प्रकाशित भाग
- ५%
- चंद्र राशि
- मेष, तक
- सूर्य राशि
- मीन
राहुकाल और टालने योग्य समय
- राहु काल
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काल
- –
शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त
- –
- आनंदादि योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूलि मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघड़िया
दिन
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
रात्रि
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग |
होरा
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र |
लग्न
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तुला | ||
| वृश्चिक | ||
| धनु | ||
| मकर | ||
| कुम्भ | ||
| मीन |
त्योहार और व्रत
चैत्र नवरात्रमुहूर्त: – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नौ तिथियों तक चलने वाला शक्ति उपासना का पर्व, जिसमें देवी के नौ रूपों की आराधना की जाती है।
गौरी तृतीयामुहूर्त: – चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व देवी गौरी की पूजा को समर्पित है।
मत्स्य जयन्तीमुहूर्त: – भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का प्राकट्य दिवस।