पंचांग
हैदराबाद का पंचांग, शनिवार १६ जनवरी 2027
आपने हैदराबाद चुना है। इस पेज पर दिए समय और तारीखें आंध्र / तेलंगाना क्षेत्र के लिए हैं, जिनकी गणना हैदराबाद के लिए की गई है। हैदराबाद में समय अलग हो सकता है, और कोई त्योहार किसी दूसरे दिन पड़ सकता है।
त्योहारों की इन तारीखों का मिलान अभी किसी छपे हुए पंचांग से नहीं किया गया है।
पंचांग के पाँच अंग और मास
- तिथि
- अष्टमी (14:13:50 – 13:43:21)
- नक्षत्र
- अश्विनी (23:50:51 – 23:38:31)
- योग
- सिद्ध (16:17:34 – 14:38:10)
- करण
- बव (02:04:22 – 13:43:21)
- वार
- शनिवार (06:49:25 – 06:49:29)
- मास (अमांत)
- पौष
- मास (पूर्णिमांत)
- पौष
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतु
- हेमंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1949/1948, विक्रम संवत 2084/2083
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्याह्न
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- बढ़ता अर्धचंद्र
- चंद्रमा का प्रकाशित भाग
- ५२%
- चंद्र राशि
- मेष
- सूर्य राशि
- मकर
राहुकाल और टालने योग्य समय
- राहु काल
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काल
- –
- गंड मूल
- –
शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त
- –
- आनंदादि योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूलि मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघड़िया
दिन
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल |
रात्रि
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ |
होरा
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल |
लग्न
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| मकर | ||
| कुम्भ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तुला | ||
| वृश्चिक | ||
| धनु | ||
| मकर |
त्योहार और व्रत
दुर्गाष्टमीमुहूर्त: – प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को देवी दुर्गा की आराधना का यह व्रत रखा जाता है।
संक्रान्त करिदिनमकर संक्रान्ति के अगले दिन मनाया जाने वाला एक स्मार्त पालन, जिसे करिदिन कहा जाता है।
शाकंभरी नवरात्रमुहूर्त: – पौष शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक देवी शाकंभरी को समर्पित नवरात्र मनाया जाता है।
आज ध्यान देने योग्य
- गंड मूल