पंचांग
जयपुर का पंचांग, शुक्रवार २८ मई 2027
आपने जयपुर चुना है। इस पेज पर दिए समय और तारीखें उत्तर भारत क्षेत्र के लिए हैं, जिनकी गणना दिल्ली के लिए की गई है। जयपुर में समय अलग हो सकता है, और कोई त्योहार किसी दूसरे दिन पड़ सकता है।
त्योहारों की इन तारीखों का मिलान अभी किसी छपे हुए पंचांग से नहीं किया गया है।
पंचांग के पाँच अंग और मास
- तिथि
- सप्तमी (04:05:07 – 06:26:30)
- नक्षत्र
- धनिष्ठा (04:19:12 – 07:13:59)
- योग
- वैधृति (02:57:10 – 03:34:02)
- करण
- बव (17:18:20 – 06:26:30)
- वार
- शुक्रवार (05:25:04 – 05:24:46)
- मास (अमांत)
- वैशाख
- मास (पूर्णिमांत)
- ज्येष्ठ
- पक्ष
- कृष्ण
- ऋतु
- वसंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- प्लवंग
- संवत
- विक्रम संवत 2084, शक संवत 1949
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्याह्न
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- घटता अर्धचंद्र
- चंद्रमा का प्रकाशित भाग
- ५६%
- चंद्र राशि
- कुम्भ
- सूर्य राशि
- वृषभ
राहुकाल और टालने योग्य समय
- राहु काल
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काल
- –
- अशुभ योग
- –
- पंचक
- –
शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त
- –
- आनंदादि योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूलि मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- रवि योग
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघड़िया
दिन
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
रात्रि
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग |
होरा
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र |
लग्न
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तुला | ||
| वृश्चिक | ||
| धनु | ||
| मकर | ||
| कुम्भ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ |
त्योहार और व्रत
कालाष्टमीमुहूर्त: – प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालभैरव की उपासना का यह व्रत रखा जाता है।
आज ध्यान देने योग्य
- वैधृति योग
- पंचक
- वार-नक्षत्र योग