पंचांग
कर्नाटक का पंचांग, रविवार २० दिसंबर 2026
इस पेज पर दिए समय और तारीखें कर्नाटक क्षेत्र के लिए हैं, जिनकी गणना बेंगलुरु के लिए की गई है।
त्योहारों की इन तारीखों का मिलान अभी किसी छपे हुए पंचांग से नहीं किया गया है।
पंचांग के पाँच अंग और मास
- तिथि
- एकादशी (22:09:43 – 20:14:56)
- नक्षत्र
- अश्विनी (15:57:48 – 14:55:33)
- योग
- परिघ (10:34:27 – 08:09:33)
- करण
- वणिज (22:09:43 – 09:18:14)
- वार
- रविवार (06:36:07 – 06:36:38)
- मास (अमांत)
- मार्गशीर्ष
- मास (पूर्णिमांत)
- मार्गशीर्ष
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतु
- हेमंत
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्याह्न
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- बढ़ता चंद्र
- चंद्रमा का प्रकाशित भाग
- ७८%
- चंद्र राशि
- मेष
- सूर्य राशि
- धनु
राहुकाल और टालने योग्य समय
- राहु काल
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काल
- –
- भद्रा
- –
- गंड मूल
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त
- –
- आनंदादि योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूलि मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- रवि योग
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघड़िया
दिन
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग |
रात्रि
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ |
होरा
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध |
लग्न
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| धनु | ||
| मकर | ||
| कुम्भ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तुला | ||
| वृश्चिक | ||
| धनु |
त्योहार और व्रत
मोक्षदा एकादशीमुहूर्त: – मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन और व्रत किया जाता है।
मौनी एकादशी (जैन)मुहूर्त: – जैन परंपरा में मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मौन धारण करने और ध्यान-साधना का पर्व।
गीता जयंतीमुहूर्त: – मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को भगवद्गीता का उपदेश दिए जाने का स्मरण किया जाता है।
आज ध्यान देने योग्य
- परिघ योग
- विष्टि करण
- गंड मूल
- वार-नक्षत्र योग