पंचांग

लंदन का पंचांग, रविवार ४ अप्रैल 2027

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पंचांग के पाँच अंग और मास

तिथि
त्रयोदशी (23:56:54 – 00:53:31)
नक्षत्र
शतभिषा (10:11:27 – 12:02:51)
योग
शुक्ल (05:43:13 – 05:17:05)
करण
गर (23:56:54 – 12:30:08)
वार
रविवार (06:29:49 – 06:27:34)
मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
पक्ष
कृष्ण
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण
संवत्सर
पराभव
संवत
शक संवत 1948/1949, विक्रम संवत 2083/2084

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
सूर्यास्त
मध्याह्न
चंद्रोदय
चंद्रास्त
चंद्र कला
घटती चंद्रकला
चंद्रमा का प्रकाशित भाग
८%
चंद्र राशि
कुम्भ
सूर्य राशि
मीन

राहुकाल और टालने योग्य समय

राहु काल
–
यमगंड
–
गुलिक काल
–
भद्रा
–
पंचक
–

शुभ समय

अभिजीत मुहूर्त
–
आनंदादि योग
–
ब्रह्म मुहूर्त
–
गोधूलि मुहूर्त
–
निशीथ मुहूर्त
–
प्रातः संध्या
–
सायं संध्या
–
विजय मुहूर्त
–

चौघड़िया

दिन

नामसेतक
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग

रात्रि

नामसेतक
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ

होरा

नामसेतक
सूर्य
शुक्र
बुध
चंद्र
शनि
गुरु
मंगल
सूर्य
शुक्र
बुध
चंद्र
शनि
गुरु
मंगल
सूर्य
शुक्र
बुध
चंद्र
शनि
गुरु
मंगल
सूर्य
शुक्र
बुध

लग्न

नामसेतक
मीन
मेष
वृषभ
मिथुन
कर्क
सिंह
कन्या
तुला
वृश्चिक
धनु
मकर
कुम्भ
मीन

त्योहार और व्रत

मासिक शिवरात्रिमुहूर्त: – प्रत्येक मास की कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव की उपासना का व्रत रखा जाता है।
प्रदोषमुहूर्त: – त्रयोदशी तिथि को शिव की उपासना का व्रत।
मधुकृष्ण त्रयोदशीमुहूर्त: – अमान्त फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को स्मार्त परंपरा में मनाया जाने वाला एक व्रत है।
वरुणी योगमुहूर्त: – अमान्त फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी पर शतभिषा नक्षत्र में बनने वाला एक पंचांगीय योग।

आज ध्यान देने योग्य

  • विष्टि करण
  • पंचक

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