पंचांग
मेलबर्न का पंचांग, शुक्रवार १३ नवंबर 2026
इस पेज पर दिए समय और तारीखें मेलबर्न के लिए हैं।
त्योहारों की इन तारीखों का मिलान अभी किसी छपे हुए पंचांग से नहीं किया गया है।
पंचांग के पाँच अंग और मास
- तिथि
- चतुर्थी (23:39:39 – 02:12:52)
- नक्षत्र
- मूल (19:48:49 – 22:46:58)
- योग
- सुकर्मा (09:09:50 – 09:55:49)
- करण
- वणिज (23:39:39 – 12:54:35)
- वार
- शुक्रवार (06:01:51 – 06:01:02)
- मास (अमांत)
- कार्तिक
- मास (पूर्णिमांत)
- कार्तिक
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतु
- शरद
- अयन
- दक्षिणायन
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1948, विक्रम संवत 2083
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्याह्न
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- बढ़ती चंद्रकला
- चंद्रमा का प्रकाशित भाग
- ११%
- चंद्र राशि
- धनु
- सूर्य राशि
- तुला
राहुकाल और टालने योग्य समय
- राहु काल
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काल
- –
- भद्रा
- –
- गंड मूल
- –
- रिक्ता तिथि
- –
शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त
- –
- आनंदादि योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूलि मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- रवि योग
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघड़िया
दिन
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
रात्रि
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग |
होरा
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र |
लग्न
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| तुला | ||
| वृश्चिक | ||
| धनु | ||
| मकर | ||
| कुम्भ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तुला |
त्योहार और व्रत
विनायक चतुर्थीमुहूर्त: – प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश के विनायक स्वरूप का व्रत और पूजन किया जाता है।
पारसी तीर आरंभशहंशाही पारसी पंचांग के अनुसार नए महीने का पहला दिन।
आज ध्यान देने योग्य
- रिक्ता तिथि
- विष्टि करण
- गंड मूल
- वार-नक्षत्र योग