पंचांग
तमिलनाडु का पंचांग, शुक्रवार २२ जनवरी 2027
इस पेज पर दिए समय और तारीखें तमिलनाडु क्षेत्र के लिए हैं, जिनकी गणना चेन्नई के लिए की गई है।
त्योहारों की इन तारीखों का मिलान अभी किसी छपे हुए पंचांग से नहीं किया गया है।
पंचांग के पाँच अंग और मास
- तिथि
- पूर्णिमा (21:30:22 – 17:47:15)
- नक्षत्र
- पुनर्वसु (13:23:51 – 10:24:58)
- योग
- विष्कम्भ (18:07:44 – 13:49:58)
- करण
- विष्टि (21:30:22 – 07:38:20)
- वार
- शुक्रवार (06:35:48 – 06:35:50)
- मास (अमांत)
- पौष
- मास (पूर्णिमांत)
- पौष
- पक्ष
- शुक्ल
- ऋतु
- हेमंत
- अयन
- उत्तरायण
- संवत्सर
- पराभव
- संवत
- शक संवत 1949/1948, विक्रम संवत 2084/2083
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- सूर्यास्त
- मध्याह्न
- चंद्रोदय
- चंद्रास्त
- चंद्र कला
- पूर्णिमा
- चंद्रमा का प्रकाशित भाग
- १००%
- चंद्र राशि
- कर्क
- सूर्य राशि
- मकर
राहुकाल और टालने योग्य समय
- राहु काल
- –
- यमगंड
- –
- गुलिक काल
- –
- भद्रा
- –
- अशुभ योग
- –
शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त
- –
- आनंदादि योग
- –
- ब्रह्म मुहूर्त
- –
- गोधूलि मुहूर्त
- –
- निशीथ मुहूर्त
- –
- प्रातः संध्या
- –
- सायं संध्या
- –
- विजय मुहूर्त
- –
चौघड़िया
दिन
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर |
रात्रि
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| रोग | ||
| उद्वेग | ||
| चर | ||
| लाभ | ||
| अमृत | ||
| काल | ||
| शुभ | ||
| रोग |
होरा
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र | ||
| शनि | ||
| गुरु | ||
| मंगल | ||
| सूर्य | ||
| शुक्र | ||
| बुध | ||
| चंद्र |
लग्न
| नाम | से | तक |
|---|---|---|
| मकर | ||
| कुम्भ | ||
| मीन | ||
| मेष | ||
| वृषभ | ||
| मिथुन | ||
| कर्क | ||
| सिंह | ||
| कन्या | ||
| तुला | ||
| वृश्चिक | ||
| धनु | ||
| मकर |
त्योहार और व्रत
पूर्णिमामुहूर्त: – प्रत्येक मास की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि, जो चंद्रमा के पूर्ण होने का दिन मानी जाती है।
माघ-स्नान आरंभमुहूर्त: – पौष शुक्ल पूर्णिमा से माघ मास का स्नान आरंभ होता है।
शाकंभरी नवरात्रमुहूर्त: – पौष शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक देवी शाकंभरी को समर्पित नवरात्र मनाया जाता है।
शाकम्भरी पूर्णिमामुहूर्त: – पौष शुक्ल पूर्णिमा को आदिशक्ति के शाकम्भरी स्वरूप की उपासना की जाती है।
आज ध्यान देने योग्य
- पूर्णा तिथि
- विष्कम्भ योग
- विष्टि करण