राम नवमी 2027: श्रीराम का जन्मदिन

राम नवमी श्रीराम का जन्मदिन है, जो चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। इसी दिन चैत्र नवरात्रि के नौ दिन पूरे होते हैं, और मंदिरों में दोपहर को पालने और फूलों की वर्षा के साथ जन्म का उत्सव मनाया जाता है।

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हर क्षेत्र में राम नवमी

राम नवमी क्या है

परंपरा में श्रीराम विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनका जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के यहाँ हुआ। रामायण उनके वनवास, सीता जी को छुड़ाने और उनकी वापसी की कथा कहती है, और परिवार उन्हें न्यायप्रिय राजा और कर्तव्यनिष्ठ पुत्र का आदर्श मानते हैं।

बहुत से घरों में चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में रामायण या रामचरितमानस का पाठ इस तरह किया जाता है कि वह राम नवमी को पूरा हो।

परिवार इसे घर में कैसे मनाते हैं

बहुत से लोग दोपहर तक व्रत रखते हैं, क्योंकि परंपरा में यही जन्म का समय है। ठीक दोपहर को परिवार पूजा घर में इकट्ठा होता है, बाल राम की मूर्ति एक छोटे पालने में लिटाई जाती है, और उनके जन्म के गीत गाते हुए पालना झुलाया जाता है।

फूल और गुलाल बरसाए जाते हैं, आरती होती है, और प्रसाद बाँटा जाता है। बहुत से मराठी घरों में यह प्रसाद पानकम होता है, यानी गुड़ और काली मिर्च का ठंडा शरबत, और सुंठवडा, यानी सोंठ से बनी मिठाई।

शाम को परिवार राम मंदिर जाते हैं, जहाँ देर रात तक भजन-कीर्तन चलते हैं, और कुछ घरों में राम रक्षा स्तोत्र का पाठ होता है।

क्षेत्र के हिसाब से क्या अलग है

महाराष्ट्र में राम मंदिरों में कई दिनों का उत्सव होता है, हर शाम कीर्तन होते हैं, और नवमी की दोपहर जन्म के उत्सव के साथ यह पूरा होता है।

अयोध्या में इस दिन नदी के घाटों पर और श्रीराम की जन्मभूमि पर भारी भीड़ होती है, और शोभायात्राओं में राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्तियाँ निकाली जाती हैं।

दक्षिण में बहुत से परिवार श्री राम नवमी को नौ दिन के उत्सव के समापन के रूप में मनाते हैं, और तेलंगाना के भद्राचलम में इस दिन राम और सीता का विवाह उत्सव मनाया जाता है।

इसकी तारीख़ कैसे तय होती है

राम नवमी चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी है, और उस दिन मनाई जाती है जब मध्याह्न में, यानी दोपहर के समय, नवमी तिथि रहती है, क्योंकि माना जाता है कि श्रीराम का जन्म उसी समय हुआ था।

राम जी की आरती और राम रक्षा स्तोत्र पढ़ें, और अयोध्या राम मंदिर कार्ड देखें।