कथा
श्राद्ध: जो श्रद्धा से अर्पित हो
बहुत से घरों में दीवार पर चंदन की माला वाली एक तस्वीर होती है, और साल में एक दिन ऐसा आता है जब रसोई में वही बनता है जो उन्हें पसंद था। वह दिन श्राद्ध का होता है। श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है: परंपरा में जो श्रद्धा से अर्पित हो, वही श्राद्ध है।
जिस तिथि को माँ या पिता गए, उस तिथि पर परिवार तर्पण करता है, यानी काले तिल मिले जल का अर्पण, और किसी के खाने से पहले पितरों के लिए भोजन का एक हिस्सा अलग रखा जाता है। और साल में एक बार पूरा परिवार मिलकर सबको याद करता है: नवरात्रि से ठीक पहले के कृष्ण पक्ष में, यानी पितृ पक्ष में, जब हर पूर्वज को उनकी अपनी तिथि पर याद किया जाता है। इसका आख़िरी दिन, सर्वपितृ अमावस्या, सभी पूर्वजों के लिए है, उनके लिए भी जिनकी तिथि अब परिवार में किसी को याद नहीं।
परंपरा में गृहस्थ के रोज़ के पंच महायज्ञों में एक पितरों के लिए भी है; बाक़ी चार देवताओं, ऋषियों, सभी जीवों और द्वार पर आए अतिथि के लिए हैं।
यह कार्ड इसी याद के लिए है। पितृ पक्ष में और श्राद्ध के दिनों में परिवार इसे पूजा घर में रखते हैं, और यह साल भर वहीं रह सकता है। यह श्राद्ध, तर्पण या उन्हें कराने वाले पंडित जी की जगह नहीं लेता। बाक़ी दिनों में यह घर के बड़ों की याद पास रखता है।
स्थान
पितृदोष निवारण यंत्र कब और कहाँ रखें
परिवार इसे पूजा घर में रखते हैं, मुख पूर्व या उत्तर की ओर, और पितृ पक्ष में और हर श्राद्ध की तिथि पर इसे ख़ास ध्यान से सामने रखते हैं। यह पर्स में आ जाने वाला कार्ड है, इसलिए जो बेटा या बेटी उस घर से दूर रहते हैं जहाँ श्राद्ध होता है, वे इसे अपने पर्स या बटुए में साथ रख सकते हैं।
आपका कार्ड
आपके कार्ड पर क्या-क्या छपता है
- पितृ देवताओं का यंत्र, जैसा यह परंपरा में बनता आया है।
- आपका नाम, आपकी लिपि में। देवनागरी में लिखें या अंग्रेज़ी में, नाम ठीक वैसा ही छपता है जैसा आपने लिखा; उसे दूसरी लिपि में बदला नहीं जाता।
- डिज़ाइन के हिसाब से और भी: जन्म की तारीख़, गोत्र, एक छोटा-सा संदेश या एक फ़ोटो।
- कार्ड का अपना QR, जिससे उसका अपना पेज खुलता है, और पीछे एक सीरियल नंबर, जो BC- से शुरू होता है।
यह सब आप भुगतान के बाद भाग्य कार्ड ऐप में या वेब पर भरते हैं, और झलक में साथ-साथ देखते जाते हैं कि कार्ड कैसा बनेगा। जब तक आप "मेरा कार्ड बनाएँ" नहीं दबाते, कुछ नहीं छपता; उसके बाद विवरण बदले नहीं जा सकते।
विधि
घर पर ही इसकी शुरुआत करें, लगभग तीस मिनट में
इन सात चरणों के लिए पंडित जी की ज़रूरत नहीं; श्राद्ध वैसे ही होता रहे जैसे आपके परिवार में हमेशा से होता आया है। हो सके तो सूर्योदय का समय चुनें।
- श्रद्धा से लिफ़ाफ़ा खोलें, किसी साफ़ जगह पर, हो सके तो पूजा घर में। खोलने से पहले एक पल रुकें, एक साँस लें।
- पानी और हल्दी से शुद्धि करें। पानी में चुटकी भर हल्दी मिलाएँ, उसमें मुलायम कपड़ा भिगोएँ और कार्ड को हल्के से पोंछ लें। यह एक प्रतीक है: इससे आप कार्ड को उसकी जगह के लिए तैयार करते हैं।
- दीया जलाएँ, फूल चढ़ाएँ। घी का एक छोटा दीया, एक गेंदा या गुलाब, और अक्षत के कुछ दाने।
- बीज मंत्र का 108 बार जप करें, यानी एक माला, कार्ड को दाहिने हाथ में लेकर। मंत्र विधि कार्ड पर छपा है।
- संकल्प लें। कार्ड को माथे से लगाएँ और अपना संकल्प, यानी मन का एक निश्चय, एक वाक्य में कहें। जैसे: "हर साल पिताजी की तिथि पर उन्हें याद करना।"
- उसे उसकी जगह रखें: पूजा घर में, मुख पूर्व या उत्तर की ओर, या घर से दूर रहते हों तो पर्स में। बाथरूम में या बेडरूम के फ़र्श पर नहीं।
- हर सुबह एक साँस भर उसे देखें। कुछ भी दोबारा करने की ज़रूरत नहीं। आपका ध्यान ही इसकी साधना है।
इसका बीज मंत्र।
लिफ़ाफ़े में क्या-क्या आता है
- आपका पितृदोष निवारण यंत्र कार्ड, आपके लिखे नाम के साथ।
- विधि कार्ड, जिस पर बीज मंत्र और सात चरण छपे हैं।
- एक सुंदर लिफ़ाफ़ा, जिसे सीधे तोहफ़े में दिया जा सके।
अगर कार्ड ख़राब हालत में या ग़लत छपा पहुँचे, तो डिलीवरी के 7 दिनों के भीतर ऑर्डर नंबर और एक फ़ोटो के साथ हमें लिखें। हम अपने ख़र्च पर नया कार्ड भेजेंगे।
उपहार
घर में तिथियाँ याद रखने वाले के लिए
बहुत से परिवारों में कोई एक व्यक्ति सारी तिथियाँ याद रखता है: वह माँ जिन्हें हर श्राद्ध याद रहता है, वह बड़ा भाई जो तर्पण करता है। उनके नाम का कार्ड यह कहने का एक सहज तरीक़ा है कि आप भी याद रखते हैं।
अभी भुगतान करें, और नाम बाद में जोड़ें, ठीक वैसा जैसा वे ख़ुद लिखते हैं। उनका मोबाइल नंबर भी जोड़ दें, तो कार्ड भाग्य कार्ड ऐप में उनके वॉलेट तक पहुँच जाएगा। जो भाई या बहन विदेश में हैं और पितृ पक्ष में घर नहीं आ पाते, उन तक छपा हुआ कार्ड 7–14 कामकाजी दिनों में पहुँचता है; विदेश में कोई कस्टम ड्यूटी लगे, तो उसका भुगतान ख़रीदार करता है।
प्रश्न
पितृदोष निवारण यंत्र कार्ड के बारे में सवाल
इसका नाम पितृदोष निवारण क्यों है?
यह इस यंत्र का परंपरा से चला आ रहा नाम है, और हमारे संग्रह में भी यही नाम है। हम आपकी कुंडली या आपके जीवन में किसी बदलाव का वादा नहीं करते। यह कार्ड प्रेम से अर्पित है, अपने पूर्वजों को याद करने के लिए।
क्या यह श्राद्ध या तर्पण की जगह ले सकता है?
नहीं। श्राद्ध और तर्पण वैसे ही करें जैसे आपके परिवार में होते आए हैं, और ज़रूरत हो तो अपने पंडित जी के साथ। यह कार्ड साल के बाक़ी दिनों में उस याद को पास रखता है।
क्या इसे पूजा घर में देवताओं के साथ रख सकते हैं?
हाँ, परिवार इसे वहीं रखते हैं। अगर आपके घर में बड़ों की तस्वीरें देवताओं से अलग रखी जाती हैं, तो कार्ड भी उन्हीं तस्वीरों के पास रखें। आपके परिवार की रीत सबसे पहले है।
श्राद्ध के दिन कब पड़ते हैं, यह कैसे जानें?
श्राद्ध तारीख़ से नहीं, तिथि से चलते हैं, इसलिए हर साल उनकी तारीख़ बदलती है। भाग्य कार्ड ऐप का मुफ़्त "श्राद्ध की तिथियाँ" टूल देहांत की तिथि से आपके शहर के लिए आने वाली तारीख़ें निकालता है, और "परिवार के अवसर" कुछ दिन पहले आपको रिमाइंडर भेजता है।
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